स्वास्थ्य साथी से युवाश्री तक गड़बड़ी के गंभीर आरोप
कोलकाता। विधानसभा में पूर्व तृणमूल सरकार के कार्यकाल से संबंधित नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट पेश किए जाने के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में भारी बवंडर खड़ा हो गया है। राज्य के वित्त मंत्री स्वप्न दाशगुप्ता ने वर्ष 2020-21 से 2024-25 तक के चार वित्तीय वर्षों से जुड़ी कुल 28 सीएजी रिपोर्ट सदन के पटल पर रखीं। इन रिपोर्ट्स में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के शासनकाल के दौरान राज्य की वित्तीय स्थिति, विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और सरकारी खजाने के उपयोग में व्यापक अनियमितताओं व कुप्रबंधन की ओर इशारा किया गया है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने इसे पूर्ववर्ती सरकार के कथित संस्थागत भ्रष्टाचार और वित्तीय अव्यवस्था का खुला दस्तावेज करार दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024-25 में राज्य का राजस्व घाटा 39,727 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का 2.19 प्रतिशत है। इसी अवधि के दौरान राज्य का वित्तीय घाटा 61,924 करोड़ रुपये या जीएसडीपी का 3.41 प्रतिशत रहा।
सीएजी ने इस बात पर चिंता जताई है कि वर्ष 2015-16 से लेकर 2024-25 तक लगातार प्रत्येक वित्तीय वर्ष में राज्य को भारी राजस्व घाटे का सामना करना पड़ा। इस पूरी अवधि में कुल राजस्व व्यय 2.53 लाख करोड़ रुपये रहा, जो कुल प्राप्त राजस्व का 118.59 प्रतिशत है। सीएजी की ऑडिट रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि पिछले पांच वर्षों के दौरान राज्य के राजस्व व्यय का अधिकांश हिस्सा वेतन, पेंशन, पुराने कर्ज के ब्याज भुगतान और अनिवार्य मदों पर ही खर्च होता रहा। इसके अलावा विभिन्न योजनाओं के नाम पर 19,444 करोड़ रुपये की सब्सिडी बांटी गई। कुल राजस्व आय का लगभग 74 प्रतिशत हिस्सा इन अनुत्पादक खर्चों में निकल जाने के कारण बुनियादी ढांचे और पूंजीगत विकास कार्यों के लिए आवश्यक निवेश नहीं हो सका। रिपोर्ट में बजट प्रबंधन की कमियों पर भी कड़े सवाल खड़े किए गए हैं। वित्तीय वर्ष के दौरान कुल 3.90 लाख करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया था, लेकिन उसमें से वास्तविक खर्च केवल 3.19 लाख करोड़ रुपये ही हो पाया। इस तरह 70,662 करोड़ रुपये (लगभग 18.09 प्रतिशत राशि) बिना किसी उपयोग के पड़ी रही या सरेंडर हो गई। इसके विपरीत, 13,486.92 करोड़ रुपये का ऐसा अतिरिक्त व्यय किया गया, जिसे विधानसभा से अब तक विधायी मंजूरी नहीं मिल सकी है। साथ ही केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए मिले हजारों करोड़ रुपये समय पर खर्च न कर पाने की बात भी सामने आई है।
विधानसभा में सीएजी रिपोर्ट पेश होने के बाद से ही राज्य में राजनीतिक गतिरोध बढ़ गया है। भाजपा नेताओं ने इसे पूर्व सरकार की प्रशासनिक विफलता और आर्थिक अव्यवस्था का प्रत्यक्ष प्रमाण बताया है, जबकि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सदन से लेकर सड़क तक तीखी बहस होने के पूरे आसार हैं।